Adhikmas Ka Kitna Mahatva: कितना ज्यादा खास है अधिकमास? वृंदावन के प्रेमानंद महाराज ने बताया

कितना ज्यादा खास है अधिकमास? वृंदावन के प्रेमानंद महाराज ने बताया, जानें इस 1 महीने में क्या करने से चमक सकती है किस्मत

Adhikmas Ka Kitna Mahatva Vrindavan Sant Premanand Maharaj Ne Bataya

Adhikmas Ka Kitna Mahatva Vrindavan Sant Premanand Maharaj Ne Bataya

Adhikmas Ka Kitna Mahatva: इस साल 2026 में अधिकमास भी लगा है। 17 मई से अधिकमास की शुरुवात हो चुकी है। अधिकमास को मलमास और पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है। सनातन वैदिक हिंदू धर्म में यह महीना अपने आप में बेहद खास है और विशेष महत्व रखता है। हालांकि इस महीने में शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते लेकिन यह महीना भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित होने के कारण पूजा-आराधना, दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अत्यंत ही शुभदायी माना जाता है। वृंदावन के प्रेमानंद महाराज ने भी अधिकमास की महत्वता बताई है। जानिए इस एक महीने में आप कैसे पा सकते हैं कई गुना फल।

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अधिकमास में भगवद आराधना का कई गुना फल मिलता

अधिकमास (Adhikmas) को लेकर प्रेमानंद महाराज (Premanand Maharaj) ने बताया कि 3 साल में एक-एक तिथि निकालकर ये अतिरिक्त 30 दिन बनाए गए। लोग अगर रोज धाम वास न कर सकें, तीर्थ न जा सकें, भगवद आराधना न कर सकें तो इसलिए 3 वर्ष में एक बार ये पुरुषोत्तम मास रखा गया है। पुरुषोत्तम मास केवल भगवान की आराधना के लिए ही है। उन्होंने कहा कि बाकी दिनों में लोग अपने ग्रहस्थ कार्यों के साथ भगवान की छोटी-मोटी पूजा करते हैं लेकिन पुरुषोत्तम मास यानि एक ये महीना भगवान को समर्पित कीजिये।

प्रेमानंद महाराज (Premanand Maharaj) ने कहा कि अधिकमास (Adhikmas) के सभी दिनों में लोग ठाकुर जी और नारायण की सेवा भक्ति करें। साधू सेवा करें, धामों में जाकर पैदल परिक्रमा करें। व्रत पूर्वक रहें, ग्रंथ पढ़ें, भगवान का नाम जप और कीर्तन करें, मंत्र अनुष्ठान करें। इस महीने ज्यादा से ज्यादा धार्मिक कार्यों को करना चाहिए और दान-पुण्य व किसी गरीब की सेवा बढ़-चढ़कर करें। अधिकमास के महीने में ऐसे करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है और बाकी दिनों के मुक़ाबले कई गुना ज्यादा फल की प्राप्ति होती है।

अधिकमास को भगवान विष्णु ने दिया अपना नाम

मान्यताओं के मुताबिक, हर मास के लिए कोई न कोई देवता है, जिसे वह महीना समर्पित है। मगर अधिकमास का स्वामी बनने के लिए कोई देवता तैयार नहीं हुआ। जिससे स्वामी विहीन होने के कारण इस मास को मलिन मान लिया गया, जिसके चलते इसका एक नाम मलमास पड़ गया। लेकिन बाद में भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम 'पुरुषोत्तम' दिया. दरअसल पुरूषोत्तम भगवान विष्णु का ही एक नाम है। इसीलिए अधिकमास के दिनों में श्रीहरि विष्णु और भगवान शिव की साधना करने से अनंत गुना फल मिलता है।

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अधिकमास 2026 कब समाप्त होगा?

आइए जानते हैं कि इस बार अधिकमास (मलमास) कितने दिनों का होगा, यह कब समाप्त होगा? आप जानते ही हैं कि अधिकमास की शुरुवात 17 मई से हो चुकी है। अधिकमास एक महीना रहेगा और यह 15 जून 2026 को समाप्त होगा। इस साल अधिकमास ज्येष्ठ माह में लगा है इसलिए इसे ज्येष्ठ मलमास या ज्येष्ठ अधिकमास कहा जा रहा है। आपको बता दें कि अधिकमास हर 3 साल में एक बार आता है। इससे पिछला अधिकमास साल 2023 सावन महीने (श्रावण अधिकमास) में लगा था। जब 2-2 सावन पड़े थे।

अधिकमास में क्या न करें?

अपने ऊपर यह तो जान ही लिया की अधिकमास में क्या करना चाहिए। अब आप यह भी जान लीजिये की अधिकमास के दिनों में किन कार्यों को करने की मनाही है। बता दें कि अधिकमास में सगाई, विवाह, मुंडन, जनेऊ, नामकरण संस्कार और गृह प्रवेश जैसे सभी तरह के मांगलिक और शुभ कार्यों पर पूरी तरह से रोक लग जाती है। इसके अलावा नया घर नहीं खरीदना चाहिए। इस दौरान नए बिजनेस या नए काम की शुरुआत करने से भी बचना चाहिए। यानि आपने अधिकमास का यह पूरा महीना केवल और केवल भक्ति में लगाना है।

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